FIR Register Nahi Ho Rahi? | Legal Remedy under BNSS 2023 Explained in Hindi

What to do if police refuse to register FIR in India explained with legal procedure and citizen rights
What to do if police refuse to register FIR in India explained with legal procedure and citizen rights

परिचय

भारत में जब किसी व्यक्ति के साथ अपराध होता है, तो सबसे पहला कानूनी कदम होता है FIR दर्ज कराना। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि पीड़ित व्यक्ति पुलिस स्टेशन जाता है, पूरी घटना बताता है, फिर भी पुलिस FIR दर्ज करने से मना कर देती है।

ऐसी स्थिति में आम नागरिक भ्रमित हो जाता है कि अब क्या किया जाए, किसके पास जाएं और क्या उसके पास कोई कानूनी अधिकार भी है या नहीं।

यह ब्लॉग इसी सवाल का पूरा उत्तर देता है —
अगर पुलिस FIR दर्ज नहीं कर रही है, तो कानून आपको क्या विकल्प देता है और आपको चरणबद्ध रूप से क्या करना चाहिए।

पुलिस FIR दर्ज न करने के पीछे कई कारण बताए जाते हैं, जैसे:

  • मामला “छोटा” बताया जाना
  • अपराध को civil dispute कहना
  • पुलिस क्षेत्राधिकार (jurisdiction) का बहाना
  • दबाव या लापरवाही
  • शिकायतकर्ता को समझौते के लिए कहना

लेकिन कानून के अनुसार, यदि सूचना संज्ञेय अपराध से संबंधित है, तो पुलिस का FIR दर्ज करना अनिवार्य है।

क्या पुलिस FIR दर्ज करने से मना कर सकती है?

कानून के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति द्वारा दी गई सूचना किसी cognizable offence से संबंधित है, तो पुलिस को FIR दर्ज करनी ही होगी।

पुलिस के पास यह अधिकार नहीं है कि वह अपनी मर्जी से FIR दर्ज करे या न करे। FIR दर्ज करना कोई उपकार नहीं, बल्कि एक कानूनी कर्तव्य है।

FIR दर्ज न होने पर पहला कदम – लिखित शिकायत

यदि मौखिक रूप से FIR दर्ज नहीं की जा रही है, तो सबसे पहला कदम है:

  • शिकायत को लिखित रूप में तैयार करना
  • घटना की तारीख, समय, स्थान और विवरण स्पष्ट रूप से लिखना
  • शिकायत की एक कॉपी अपने पास रखना

लिखित शिकायत देने से बाद में यह साबित किया जा सकता है कि आपने पुलिस को सूचना दी थी।

दूसरा कदम – वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को शिकायत

यदि थाना प्रभारी FIR दर्ज नहीं करता है, तो कानून आपको अधिकार देता है कि आप:

  • जिले के Superintendent of Police (SP)
  • या Deputy Commissioner of Police (DCP)

को अपनी शिकायत भेजें।

यह शिकायत:

  • पोस्ट के माध्यम से
  • ईमेल द्वारा
  • या व्यक्तिगत रूप से

दी जा सकती है।

वरिष्ठ अधिकारी के पास यह शक्ति होती है कि वह FIR दर्ज करने का आदेश दे या स्वयं जांच शुरू कराए।

तीसरा कदम – Magistrate के पास आवेदन

यदि पुलिस अधिकारी स्तर पर भी आपकी FIR दर्ज नहीं होती, तो आप न्यायालय का सहारा ले सकते हैं।

आप संबंधित क्षेत्र के Judicial Magistrate के समक्ष आवेदन दे सकते हैं, जिसमें आप बताएंगे कि:

  • आपने पुलिस को सूचना दी
  • FIR दर्ज नहीं की गई
  • मामला संज्ञेय अपराध का है

Magistrate पुलिस को FIR दर्ज करने और जांच करने का आदेश दे सकता है।

क्या सीधे अदालत जाना गलत है?

नहीं। जब पुलिस अपने कर्तव्य का पालन नहीं करती, तो अदालत जाना आपका संवैधानिक और कानूनी अधिकार है।

हालांकि, अदालत जाने से पहले यह जरूरी है कि:

  • आपने पुलिस को पहले मौका दिया हो
  • आपकी शिकायत स्पष्ट और तथ्यात्मक हो

ऑनलाइन FIR या शिकायत का विकल्प

कई राज्यों में अब:

  • ऑनलाइन शिकायत
  • ई-FIR
  • महिला अपराधों के लिए विशेष पोर्टल

उपलब्ध हैं।

हालांकि, सभी प्रकार के अपराधों के लिए ऑनलाइन FIR संभव नहीं होती, लेकिन शिकायत दर्ज कराना एक मजबूत रिकॉर्ड बनाता है।

क्या FIR दर्ज न होने पर कोई सजा है?

यदि कोई पुलिस अधिकारी जानबूझकर FIR दर्ज नहीं करता, तो उसके खिलाफ:

  • विभागीय कार्रवाई
  • कानूनी कार्रवाई

हो सकती है।

यह कानून इसलिए बनाया गया है ताकि आम नागरिक के अधिकार सुरक्षित रहें।

आम नागरिक को क्या सावधानियां रखनी चाहिए

  • शिकायत हमेशा स्पष्ट और सच्ची हो
  • झूठी FIR से बचें
  • लिखित प्रमाण जरूर रखें
  • दबाव या डर में शिकायत वापस न लें
Steps to follow if police refuse to register FIR in India including written complaint to police station SP or DCP and application before magistrate

एक सरल उदाहरण

मान लीजिए किसी व्यक्ति के साथ मारपीट हुई। वह पुलिस स्टेशन गया, लेकिन पुलिस ने कहा कि “आपस में समझौता कर लो।”

ऐसी स्थिति में:

  • यह संज्ञेय अपराध है
  • FIR दर्ज करना अनिवार्य है
  • पीड़ित व्यक्ति ऊपर बताए गए सभी कानूनी कदम उठा सकता है

Agar police FIR register kar leti hai tab ?

Iske liye yahan hai iska blog, jisme humhe pata chalega ki police FIR register ke baad poora process kya hai. Read the blog. 

निष्कर्ष

FIR दर्ज न होना कोई अंतिम स्थिति नहीं है। कानून ने आम नागरिक को कई रास्ते दिए हैं ताकि वह अपने अधिकारों की रक्षा कर सके।

यदि पुलिस FIR दर्ज नहीं कर रही है, तो:

  • घबराने की जरूरत नहीं
  • कानून को समझने और सही कदम उठाने की जरूरत है

सही जानकारी ही सबसे बड़ी ताकत है।

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